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सिर्फ राम को राम बनाया कैकेयी ने

…….सिर्फ राम को राम बनाया कैकेयी ने

नव सम्वत्सर पर काव्य गोष्ठी

जय गोविन्द साहू (पत्रकार) 

बांसी। नगर स्थित बरिष्ठ कवि डा. ज्ञानेंद्र द्विवेदी दीपक के आवास पर नव सम्वत्सर के अवसर पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. दीपक ने अपनी रचना सुनाया कि राज कुंवर तो कितने आकर चले गए, सिर्फ राम को राम बनाया कैकेयी ने। जिसे लोगों ने खूब सराहा।

गोष्ठी संचालक कवि सुशील श्रीवास्तव सागर ने मां सरस्वती की वंदना के बाद सुनाया कि उम्र भर जलता रहा हूं मैं चिरागों की तरह, राह में फिरता रहा तेरी दीवानों की तरह। जिसपर उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी। बरिष्ठ कवि ब्रम्हदेव शास्त्री पंकज की रचना ‘धरा पर फिर उतरा मधुमास, जीव जंतु जड़ चेतन सबके चेहरों पर उल्लास’ को खूब सराहा गया। हास्य कवि राकेश त्रिपाठी गंवार ने सुनाया कि औकात भूल जाओगे सब उसके सामने, बेगम को एक रोज खफा करके देखिए। जिसपर लोगों ने खूब ठहाके लगाए। कवि कृष्ण कुमार मिश्र ने कहा कि जिन महलों पर गर्व तुम्हे है पलक झपकते ठह जाएंगे व कवि अमलेन्दु शुक्ल ने सुनाया कि आशा की एक नई पिटारी लेकर आया है, देखो देखो नव सम्वत्सर आया है। कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता कैलास वाजपेयी, रमेश चन्द्र द्विवेदी के अलावा कई लोग शामिल रहे।

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